आज मुझे यह कहने दो
आज मुझे यह कहने दो
कि मेरा सोच गलत नहीं था
नया परिवेश नया मकान
निभाना इतना सहज नहीं था
फिर भी मैंने तालमेल
किया है
अब कोई समस्या नहीं
है ।
खाली घर और हम अकेले
करते तो क्या करते
आने को हुए बाध्य
कैसे अकेले रह पाते वहाँ ।
स्वास्थय ने भी किनारा किया
वह भी साथ न दे पाया
आखिर वक्त से सम्झौता किय
यहाँ आने का मन बनाया ।
आशा


बहुत ही सुंदर हृदय स्पर्शी सृजन।
जवाब देंहटाएंअनुसरण कर्ता बटन लगाए।
सादर
धन्यवाद अनोखी जी टिप्पणी के लिए
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