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अनोखा एहसास

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                                                    हुआ अनोखा एहसास मुझे                                                        यह कैसे हुआ क्या हुआ                                                             मैं जानती कैसे              ...

जा कर भूला

  लाने गया बाजार मे बरफी जा कर भूला क्या करना है लो आ गया फिर से जहाँ से चला था पर याद ना आई अब भी बरफी    की । अशा

पुस्तक

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                    आशा कैसी किससे करे कोई तो अपना हो कब तक आश्रित रहूगी   यह तक मालूम नहीं । किताब भी मौन है कुछ बोलती नहीं न जाने कैसे नाराज हुई है यह भी मालूम नहीं। किताब भी मौन है कुछ बोलती नहीं न जाने कैसे नाराज हुई है यह भी मालूम नहीं है । यह   कैसा अन्याय है मेरे साथ ही है ऐसा किस लिये यह   तक समझ न पाई तुमसे दूरी किस लिये । आशा  

आज मुझे यह कहने दो

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    आज मुझे यह कहने दो कि मेरा सोच गलत नहीं था नया परिवेश नया मकान निभाना इतना सहज नहीं था   फिर भी मैंने तालमेल   किया है अब कोई समस्या   नहीं है । खाली घर और हम अकेले करते तो   क्या करते आने को हुए बाध्य कैसे अकेले रह पाते वहाँ ।   स्वास्थय ने भी किनारा किया वह भी साथ न दे पाया आखिर वक्त से सम्झौता किय                                                                                       यहाँ आने का मन बनाया । आशा