पुस्तक


 

                  आशा कैसी किससे करे

कोई तो अपना हो

कब तक आश्रित रहूगी

 यह तक मालूम नहीं ।

किताब भी मौन है

कुछ बोलती नहीं

न जाने कैसे नाराज हुई है

यह भी मालूम नहीं।

किताब भी मौन है

कुछ बोलती नहीं

न जाने कैसे नाराज हुई है

यह भी मालूम नहीं है

यह  कैसा अन्याय है

मेरे साथ ही है ऐसा किस लिये

यह  तक समझ न पाई

तुमसे दूरी किस लिये ।

आशा

 

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