अनोखा एहसास
हुआ अनोखा एहसास मुझे
यह कैसे हुआ क्या हुआ
मैं जानती कैसे
अब मुझे विचार करना होगा ।
जब आज तक न जान पाई
न जाने कब तक
इंत्जार रहेगा तुम्हारा
मैं कैसे जान पाती ।
मन का विश्वास
अभी खोया नहीं है
हैअसीम श्रद्धा प्रभू पर
यह तो याद है मुझे ।
अचानक ख्याल आया मुझे
पहले जब तुमसे मिली थी
एक बात का वादा किया था
वही रहा है नियामत मेरे लिये ।
आशा
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बहुत सुंदर सृजन।
जवाब देंहटाएंसादर
बहुत सुंदर रचना 🙏
जवाब देंहटाएंसुंदर।
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