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मन में उठते भाव शब्दों की सीढ़ी चढ़ते कभी अर्थ न निकलता पर कभी सुंदर विचार आते विचारों की श्रृंखला जब बनती सार दार अभिव्यक्ति जन्म लेती जितनी बार आंखों से गुजरती गंभीर रचना जन्म लेती ऐसे ही लेखन का प्रारंभ होता कितनी सीढ़ी चढ़ पाते यह तो याद नहीं पर अर्थ आते ही लिखना बंद करते पढ़ने योग्य वाक्य का समूह होता अब नाम। आशा लता सक्सेना
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